Yeh-Madhur-Kasak-1
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यह मधुर कसक-1, yeh-madhur-kasak-1, Hindi Sex Stories


Hindi Sex Stories


यह मधुर कसक-1

गंगा मौसी मेरी मां की सबसे छोटी बहन हैं। यूँ तो वो दिखने में सुन्दर है। वो छोटी सी उमर में ही विधवा हो गई थी। उनकी देह मुझे बहुत कामुक लगती थी। सच पूछो तो मुझे उनका सामीप्य अच्छा लगता था। मैं दिनों-दिन उनकी ओर आकर्षित होता जा रहा था। मौसी भी मेरी नजर पहचान गई थी। जब से मेरे दिल में उनके प्रति चाह उभरने लगी थी, मन में चोर था सो मैं उनसे बात करने में भी हिचकिचाने लगा था।

गांव में मैं अपने मामा-मामी के यहाँ गांव में छुट्टियों में अक्सर जाता रहता था। उनके घर में जगह कम थी सो वो मुझे मेरी चाची चम्पा के घर में ठहरा देती थी। चम्पा आण्टी ने मुझे ऊपर वाला एक कमरा दे रखा था। चाचा दुबई में काम करते थे, कभी कभार छः माह में एक बार वो आ जाते थे। चम्पा आण्टी मुझे देख कर खुश हो जाया करती थी। वो मेरा बहुत ध्यान रखती थी। उनने मुझे कितनी ही बार आंखों से अश्लील इशारे भी किये पर मेरा आकर्षण तो गंगा मौसी की तरफ़ ही था।

चम्पा आण्टी के अश्लील इशारों को मैं अनदेखा कर देता था, पर कब तक करता ? उनकी गिरफ़्त में मैं आ ही गया। आखिर मैं भी तो भरा पूरा जवान लड़का था। मेरा भी लण्ड जोर मारता था।

एक रात तेज बरसात हो रही थी। चम्पा आण्टी को बहाना मिल गया। वो मेरे कमरे में आ गई। उन्होंने उन समय नाईट गाऊन पहना हुआ था।

"बल्लू, मुझे बहुत डर लग रहा है, मैं रात को यहीं सो जाऊं?"

"आपका घर है आण्टी, मैं नीचे सो जाऊंगा, पर आप इतना बरसात से इतना डरती क्यूं हैं?"

वो तिरछी नजरों से देख कर मुस्कराई। मैं समझ गया कि आज चम्पा रानी का इरादा कुछ और ही है। यह सोच कर ही मेरा लण्ड खड़ा होने लगा। उनके वासनामय तेवर मुझे समझ में आ रहे थे। तभी जैसे बादल गरजे और लाईट चली गई। गांव में लाईट जाना तो एक आम सी बात थी। वो तुरन्त आकर मुझसे लिपट गई। मैं सही सोच रहा था, वो बेचारी वासना से अभिभूत थी। उन्हें शरीर की भूख थी। अन्धेरे में मुझे लगा कि जैसे वो गंगा मौसी हो।

"हाय, कैसी बरसात हो रही है, बिजली कड़कने से कितना डर लगता है?" उन्होंने मुझसे और भी चिपकते हुये कहा। अपनी चूत को उन्होंने मेरे लण्ड पर दबा दिया। यह एक स्पष्ट इशारा था।

"मत डरो आण्टी, मैं हूँ ना ... "मैंने जानकर उन्हें अपनी बाहों में दबा लिया। उनकी मदमस्त जवानी के उभारों का जायजा लिया। उनके सीने के उभारों को अपनी छाती से चिपका कर रगड़ लिया। उनके कोमल चूतड़ों को अपनी तरफ़ खींच लिया। मेरा लण्ड में खलबली मचने लगी और वो खड़ा हो कर उनकी चूत के आसपास रगड़ मारने लगा था। उन्हें भी यही चाहिये था।

"ओह अंधेरे में कुछ भी नहीं दिख रहा है ... अरे यह क्या है ?" उन्होंने जान करके मेरे लण्ड की रगड़ से तड़प कर कहा। अब भला कैसे कहू कि ये मेरा लौड़ा है, जिसे उन्होंने जानबूझ कर पकड़ लिया था और अनजान बन रही थी।

"ओह ... कुछ नहीं आंटी ... " मेरा पूरा लण्ड उनके हाथ में दबोचा हुआ था।

"हाय यह तो ... मर गई मैं तो..." और उन्होंने जल्दी से उसे छोड़ दिया। वो मुझसे दूर हटने का प्रयत्न करने लगी। मगर मेरा लण्ड खड़ा हो चुका था, और इतना कुछ होने के बाद भला उन्हें कौन छोड़ता ? मैंने भी अन्जान बनते हुये चम्पा की चूचियों पर हाथ रख दिया।

"ओह आण्टी ये नरम नरम सी गेन्द जैसी क्या है?" मैंने उनकी चूचियाँ टटोलकर उन्हें हिला दिया। उनकी चूचियाँ मेरे हाथों में ही थी कि लाईट आ गई। वो बुरी तरह से शरमा गई।

"आण्टी, आईये, यहीं सो जाईये, डरिये मत ... देखिये मैं आपसे चिपक कर सो जाता हूँ, फिर आपको डर नहीं लगेगा।"

वो मेरा मतलब समझ कर मुझे देख कर मुस्करा कर देखने लगी। वो मेरी बातों सुन कर उत्साहित हो गई।

"देखो ज्यादा चिपकना मत !" मैंने हंसते हुये उन्हे बिस्तर पर लेटा दिया और उनके पास ही मैं भी लेट गया। अब तो उनसे रहा नहीं गया, वो अचानक ही पलट कर मुझसे लिपट गई।

"अब चिपको तो मत आण्टी, खुद ही मना कर रही थी और खुद ही चिपक रही हो?"

उनकी सांसें तेज हो चुकी थी। मेरी भी धड़कने तेज हो उठी थी।

"बुद्धू कहीं का !"

उनकी गुलाबी आंखे ऊपर उठ कर मेरी तरफ़ घूरने लगी। उनके होंठ थरथरा उठे... उनकी आंखें अब बन्द होने लगी। मैंने धीरे से उनके लबों के पास आकर उन्हें चूम लिया।

"तो चिपक लें अब !"

"चुप हो जा बल्लू !"

"आण्टी, यह गाऊन खोल दो ना !"

"आं हां, नहीं, मुझे शरम आती है।"

"बहुत आनन्द आ रहा है, मेरा लण्ड कड़ा हो गया है, प्लीज ... आपको चोदने का बहुत मन हो रहा है।"

"मत कहो ऐसा ... मेरा मन बहक रहा है।"

"हां, आण्टी ... प्लीज ... लौड़ा घुसाने दो ना?"

"तू बहुत शैतान है रे ... अपने आप नहीं खोल सकता है क्या ?"

चम्पा की आंखें वासना से भरी हुई थी, उनकी चूत गरम हो उठी थी, बस उसमें एक जानदार लण्ड घुसाना बाकी था। मैं चम्पा को चूमते हुये उनके ऊपर चढ़ गया। पजामे को नीचे सरका दिया। मेरा लण्ड टन्न से लहरा उठा। लगता था कि उनकी बड़ी बड़ी झान्टें थी जो उनकी चूत के गीलेपन से भीग गई थी। जरा सा जोर लगाते ही वो इधर उधर फ़िसलता हुआ चूत के द्वार पर पहुंच गया। मैं कुछ देर वैसे ही बिना कुछ किये पड़ा रहा। तब उनका मन विचलित हो उठा। उनकी चूत मेरे लण्ड को निगलने के लिये बार बार अपनी चूत उठा कर मेरे लण्ड पर दबाव डालने लगी।

"क्या कर हो बल्लू, हाः मेरा तो ... हाय ... लण्ड घुसेड़ो ना !"

"बस आपकी आज्ञा का इन्तज़ार था ... यह लीजिये !" मैंने भी बहक कर उनकी चूत पर जोर लगा दिया। मुझे भी उने चोदने की लगी थी, पर मैं उन्हें तड़पाना चाहता था। तेज बरसात में उनके मुख से एक तेज चीख निकल गई। लण्ड पूरा ही एक झटके में अन्दर घुस गया। था। मुझे भी एक तेज मीठी सी गुदगुदी हुई।

"धीरे से चोदो ना ... मोटा लण्ड है , लगेगी अन्दर !" उनकी कराह भरी आवाज आई।

"सॉरी आण्टी ..." मैं उन्हें धीरे धीरे चोदने लगा। वो मस्त होने लगी। कुछ ही देर में उनकी चूत जोर से चुदाने के लिये छटपटाने लगी।

"अरे, क्या बैलगाड़ी की तरह चोद रहा है, जोर से चोद ना !"

मुझे हंसी आ गई। मैंने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी। अब उन्हें अथाह आनन्द आने लगा।

"साले तुझे इतने समय से पटाना चाह रही थी, पर तू हरामी मुझे ही तड़पाता रहा।"

"चाची, ऐसे कैसे चोद देता, तुम मुझे घर से निकाल देती तो?"

"अरे मेरे जानू, बहुत बनैला है तू तो, तू तो जैसे मेरा इशारा तो समझता ही नहीं था, फिर देरी क्यूँ की ... हाय चोद अब जोर से !"

बेचारी की तड़प भला मैं कैसे समझता ? लण्ड तो मेरा भी तो तन्ना जाता था उन्हें देख कर, पर हिम्मत तो चम्पा ने ही की थी ना। मुझे लगा, पहल तो मर्दों को ही करनी चाहिये, वर्ना औरतों के मामले तो कभी भी सफ़ल नहीं हो सकते। मेरी समझ में यह बात आ गई थी। मैं रात भर उनकी चूत का फ़लूदा बनाता रहा ... कभी उनकी कमसिन गाण्ड को पीट पीट कर उने चोद डालता था ... पर जाने वो कितने जन्मों की भूखी थी ... कि हर बार मुझे पकड़ लेती थी। यह दौर चल निकला तो आगे चलता ही गया। मुझे रात को वो सोने ही नहीं देती थी। मेरी जिस्मानी वासना उने चोद कर और बढ़ गई थी।

कहते हैं ना जब आप एक शिकार कर लेते हैं तो आपका अगला शिकार को फ़ंसाने की योजना बनाने लग जाते हैं। अब तो अगले शिकार के चक्कर में गंगा मौसी को फ़ंसाने के लिये मेरा दिल छटपटाने लगा। मुझे रह रह कर उनका जवान जिस्म नजर आ जाता था। मैं कल्पना में उनकी चूत देखता था, उनकी चूचियाँ मसलता था। अब मेरा दिल बेकाबू होने लगा था।

गंगा मौसी को मैं फ़ंसा पाया या नहीं ... पर मेरी कोशिशों को आप जरूर सराहेंगे। पर यह तो सर्वोच्च सत्य है कि पहल तो मर्द को ही करनी पड़ती है ... परिणाम चाहे जो हो।

भाग-2 जरूर पढ़िये।


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